जीवन के चतुर्थ पड़ाव पर में जब पीछे मुडकर देखता हूँ तो सब कुछ बहुत दूर दिखाई देता है... कहाँ से शुरू करूँ...जहाँ तक मेने पढ़ा है लोग किसी महत्वपूर्ण घटना से लिखना शुरू करते हैं. मेरा तो पूरा जीवन ही महत्वपूर्ण था...
वैसे मैंने पढ़ा है की लोग जीवन के किसी सुंदर से क्षण का जिक्र करते है. पर मुझे याद नहीं आता की वोह सुन्दर सा लम्हा कौन सा था... मेरे जीवन मैं .. कहाँ से शुरू करू...
जीवन इतना जटिल हो गया है की समझ नहीं आ रहा है की क्या करूँ... शायद उम्र का बदलाव है... लेकिन अभी उम्र ही क्या है... मैं तो हमेशा समय के साथ कदम से कदम मिला के चला था... फिर क्यूँ अजीब से खालीपन जिंदगी को सालता रहता है...
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